पृथ्वी के समतल होने का प्रमाण: दिन के उजाले में सूर्य और चंद्रमा एक साथ दिखाई देते हैं
सत्य रेटिंग

खारिज
यह दावा कि सूर्य और चंद्रमा को एक साथ देखने से पृथ्वी के गोलाकार होने का सिद्धांत गलत साबित होता है, पूरी तरह से गलत है और कक्षीय यांत्रिकी की गलतफहमी पर आधारित है।
यह दावा कि सूर्य और चंद्रमा को एक साथ देखने से पृथ्वी के गोलाकार होने का सिद्धांत गलत साबित होता है, पूरी तरह से गलत है और कक्षीय यांत्रिकी की गलतफहमी पर आधारित है।
🔥त्वरित प्रतिक्रिया:
- चांद सिर्फ रात की शिफ्ट के लिए ही नहीं आता 🌙
- बुनियादी ज्यामिति इस समतल पृथ्वी के सिद्धांत को 'कक्षा' शब्द कहने से भी तेज़ी से गलत साबित कर देती है 🌍🔥
🔥त्वरित प्रतिक्रिया:
- •चांद सिर्फ रात की शिफ्ट के लिए ही नहीं आता 🌙
- •बुनियादी ज्यामिति इस समतल पृथ्वी के सिद्धांत को 'कक्षा' शब्द कहने से भी तेज़ी से गलत साबित कर देती है 🌍🔥
दावे का विवरण:
📝 तथ्यों की जांच: पृथ्वी के ग्लोब मॉडल में कभी यह दावा नहीं किया जाता कि चंद्रमा 'रात वाले हिस्से' पर ही स्थिर रहता है! 🌍 दरअसल, चंद्रमा हर 29.5 दिनों में पृथ्वी का पूरा चक्कर लगाता है। क्योंकि यह लगातार हमारे चारों ओर घूमता रहता है, इसलिए सूर्य के सापेक्ष इसकी स्थिति बदलती रहती है। इसी कारण, यह अपनी कक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पृथ्वी के उसी तरफ बिताता है जहाँ सूर्य होता है, जिससे यह दिन के समय भी पूरी तरह से दिखाई देता है। 🌕☀️
तथ्य जांच तिथि: 2 अप्रैल 2026
महत्वपूर्ण चेतावनी
अस्वीकरण: यह टूल सामान्य जानकारी प्रदान करता है और व्यक्तिगत, पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है।
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